Description
डॉ. बी. एन. मणि त्रिपाठी द्वारा लिखित हिंदू विधि हिंदू व्यक्तिगत विधि के प्रमुख सिद्धांतों, अवधारणाओं और वैधानिक प्रावधानों का सुव्यवस्थित तथा विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक हिंदू विधि के पारंपरिक स्रोतों, सिद्धांतों तथा आधुनिक विधायी विकासों को सरल और स्पष्ट भाषा में समझाती है, जिससे पाठकों को विषय की मूलभूत समझ आसानी से प्राप्त हो सके।
पुस्तक में हिंदू विधि के ऐतिहासिक विकास, उसके स्रोतों तथा विभिन्न सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, हिंदू विवाह, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण, संरक्षकता तथा उत्तराधिकार से संबंधित प्रमुख अधिनियमों और उनके प्रावधानों का विस्तार से वर्णन किया गया है। न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों के माध्यम से इन विधिक सिद्धांतों की व्याख्या भी की गई है, जिससे विषय का व्यावहारिक पक्ष स्पष्ट रूप से सामने आता है।
सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित शैली में लिखी गई यह पुस्तक विधि के विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। हिंदू व्यक्तिगत विधि के अध्ययन और समझ के लिए यह एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय संदर्भ ग्रंथ के रूप में कार्य करती है।
\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"छह दशकों से अधिक समय से, न्यायमूर्ति आर.के. अग्रवाल की \\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"हिंदू लॉ\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\" (Hindu Law) पूरे भारत में कानून के छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक अनिवार्य संसाधन रही है। पहली बार 1958 में प्रकाशित यह पुस्तक अब अपने पूरी तरह से अद्यतन 27वें संस्करण में है, जो इसकी स्थायी प्रासंगिकता और लोकप्रियता का प्रमाण है।
छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई यह पाठ्यपुस्तक सरल, स्पष्ट और गैर-तकनीकी भाषा में लिखी गई है, ताकि बुनियादी कानूनी सिद्धांतों की स्पष्ट समझ सुनिश्चित हो सके और रटने की आवश्यकता न पड़े।
प्रमुख विशेषताएं और संरचना:
अधिनियमित कानून (Enacted Laws): पुस्तक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन क्रांतिकारी कानूनों के केंद्रित अध्ययन के लिए समर्पित है जिन्होंने हिंदू कानून को बदल दिया:
हिंदू विवाह अधिनियम, 1955
हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956
हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम, 1956
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956
तुलनात्मक विश्लेषण: इस पुस्तक की एक मुख्य विशेषता इन अधिनियमों से पहले और बाद के कानून का तुलनात्मक विश्लेषण है, जिसे उदाहरणों और रेखाचित्रों के माध्यम से समझाया गया है।
27वां संस्करण और अद्यतन: डॉ. एच.एच. सिंह द्वारा संशोधित इस संस्करण में माननीय उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के सभी प्रमुख और हालिया निर्णयों को शामिल किया गया है।
महत्वपूर्ण विधायी परिवर्तन: यह व्यक्तिगत कानून (संशोधन) अधिनियम, 2019 के प्रभाव को दर्शाता है, जिसने कुष्ठ रोग (leprosy) को न्यायिक पृथक्करण/तलाक और अलग भरण-पोषण के आधार के रूप में हटा दिया है।
छात्रों द्वारा भरोसेमंद और शिक्षक बिरादरी द्वारा प्रशंसित यह व्यापक मार्गदर्शिका हिंदू कानून का अध्ययन करने या उसे लागू करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए आज भी उतनी ही आवश्यक बनी हुई है।\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\\"
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