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संविदा-I [भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 एवं विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963]

380.00

EDITION: 11th Ed. (2024)
FORMAT: PAPERBACK
ISBN: 978-93-92140-58-7
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 343
PUBLISHER CODE: TBH/14
CATEGORY: TEXTBOOKS HINDI, CONTRACT LAW, SPECIFIC RELIEF

EDITION: 11th Ed. (2024)
FORMAT: PAPERBACK
ISBN: 978-93-92140-58-7
LANGUAGE: HINDI
PAGES: 343
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CATEGORY: TEXTBOOKS HINDI, CONTRACT LAW, SPECIFIC RELIEF

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\\\\\\\"डॉ. एन.वी. परांजपे की पुस्तक \\\\\\\"\\\\\\\"कॉन्ट्रैक्ट–II, सेल ऑफ गुड्स एक्ट एवं पार्टनरशिप एक्ट\\\\\\\"\\\\\\\" (Contract–II, Sale of Goods Act and Partnership Act) एक व्यापक और व्यावहारिक पुस्तक है, जो विशिष्ट संविदाओं और संबद्ध विषयों पर केंद्रित है। इसमें विशेष रूप से वस्तु विक्रय अधिनियम, 1930 और भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 को शामिल किया गया है, जो मूल रूप से अलग कानून के रूप में अधिनियमित होने से पहले भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 का हिस्सा थे।

यह पुस्तक तीन भागों में विभाजित है:

भाग I: इसमें विशिष्ट संविदाओं (specific contracts) जैसे कि क्षतिपूर्ति (indemnity), उपनिधान (bailment), गिरवी (pledge) और एजेंसी पर चर्चा की गई है।

भाग II: वस्तु विक्रय अधिनियम के प्रावधानों की व्याख्या करता है, जिसमें स्वामित्व, संपत्ति का हस्तांतरण, शर्तें (conditions), वारंटी और अनुबंध के उल्लंघन के लिए उपचार शामिल हैं।

भाग III: भारतीय भागीदारी अधिनियम पर चर्चा करता है, जिसमें भागीदारी का गठन, भागीदारों के अधिकार और कर्तव्य, विघटन (dissolution) और पंजीकरण को कवर किया गया है।

एक स्पष्ट और व्यवस्थित शैली में लिखी गई यह पुस्तक विधायी प्रावधानों को उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयज विधि (केस लॉ) के साथ मिश्रित करती है, जिससे पाठकों के लिए यह समझना आसान हो जाता है कि कानूनी सिद्धांतों को व्यवहार में कैसे लागू किया जाता है।

यह पुस्तक कानून के छात्रों, शिक्षकों और पेशेवरों के साथ-साथ वाणिज्य, व्यवसाय प्रबंधन और कॉर्पोरेट क्षेत्र के लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने का लक्ष्य रखती है।\\\\\\\"
यह संस्करण बैंक गारंटी, प्रतिभूति (suretyship), उपनिधान (bailment) और भागीदारी की कानूनी स्थिति पर हाल के न्यायिक निर्णयों को शामिल करने के लिए पूरी तरह से संशोधित और अद्यतन किया गया है, जो पुस्तक को वर्तमान कानूनी विकास के लिए अत्यधिक प्रासंगिक बनाता है।

एक सरल और व्यवस्थित तरीके से लिखी गई यह पुस्तक पाठकों को जटिल कानूनी प्रावधानों को आसानी से समझने में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह विशेष रूप से L.L.B., L.L.M., वाणिज्य, व्यवसाय प्रशासन और प्रबंधन के छात्रों के साथ-साथ न्यायिक सेवाओं, सिविल सेवाओं और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए उपयोगी है।\\\\\\\\\\\\\\\"

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