\\\\\\\"के.के. श्रीवास्तव द्वारा लिखित \\\\\\\'द लॉ ऑफ ड्राफ्टिंग, प्लीडिंग्स एंड कन्वेयन्सिंग\\\\\\\' (The Law of Drafting, Pleadings and Conveyancing) एक व्यापक और अभ्यास-उन्मुख कृति है, जो कानूनी प्रारूपण (ड्राफ्टिंग) के सिद्धांतों और तकनीकों को स्पष्टता और सटीकता के साथ समझाती है।
यह पुस्तक सिविल और आपराधिक प्रक्रिया के तहत अभिवचन (pleadings) के साथ-साथ हस्तांतरण-लेखन (conveyancing) और कानूनी दस्तावेजों के प्रारूपण पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करती है। इसमें वाद-पत्र (plaints), लिखित कथन (written statements), याचिकाएं, शपथ-पत्र (affidavits), संविदा (contracts), विलेख (deeds) और समझौतों के उदाहरणात्मक प्रारूप शामिल हैं, जो पाठकों को सिद्धांत और व्यावहारिक अनुप्रयोग दोनों को समझने में सक्षम बनाते हैं।
अपने व्यवस्थित दृष्टिकोण और प्रक्रियात्मक एवं मूल आवश्यकताओं के स्पष्ट विवरण के साथ, यह पुस्तक विशेष रूप से कानून के छात्रों, अधिवक्ताओं, न्यायिक सेवा अभ्यर्थियों और अभ्यास करने वाले पेशेवरों के लिए उपयोगी है। के.के. श्रीवास्तव की यह कृति प्रभावी और कानूनी रूप से सुदृढ़ ड्राफ्टिंग में महारत हासिल करने के लिए एक विश्वसनीय संदर्भ के रूप में कार्य करती है।\\\\\\\"
यह वाद-पत्र (plaints), लिखित कथन (written statements), याचिकाएं, शपथ-पत्र (affidavits), नोटिस, अनुबंध, विलेख (deeds) और कानूनी अभ्यास में आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले अन्य उपकरणों के प्रारूपण को कवर करती है। वैधानिक प्रावधानों, प्रक्रियात्मक नियमों और उदाहरणात्मक प्रारूपों (formats) द्वारा समर्थित यह पुस्तक पाठकों को अदालतों और कानूनी कार्यालयों में आवश्यक ड्राफ्टिंग कौशल से सुसज्जित करती है।
एक स्पष्ट और पेशेवर शैली में लिखी गई यह पुस्तक कानून के छात्रों, अधिवक्ताओं, न्यायिक अभ्यर्थियों और प्रभावी कानूनी ड्राफ्टिंग में महारत हासिल करने के इच्छुक कानूनी पेशेवरों के लिए एक अनिवार्य संसाधन है।\\\\\\\\\\\\\\\"




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